जीव-जंतुवां री मदद करणो ईश्वर री पूजा कियां मानीजै है?
जीव-जंतुवां री मदद करणो ईश्वर री पूजा कियां मानीजै है?
भगवान ज्ञान रै रूप मांय सगळा प्राणी रै मांय रैवै है। जे जीव-जंतुवां रै कनै भोजन नीं है तो वै दुख भोगैला अर मर जावैला। इण वास्तै, जे आपां उण जीव नै खिलावां तो बो जीव अर भगवान दोनूं ई सुखी हुय जावैला। तो जीव-जंतुवां री मदद करणो ईश्वर री पूजा है।
आ बात साची समझणी चाइजै कै करुणा सूं मिलण आळो असली ज्ञान ईश्वर रो ज्ञान है।
करुणा सूं मिलण आळो अनुभव ईश्वर रो अनुभव है। मदद करण सूं मिलण आळी खुशी नै भगवान रो परमानंद कैवै है।
मारवाड़ी भाषा में वल्लालर अर वांरी पोथ्यां रै बारै में सगळी बातां
सगळा जीव बराबर है।मिनख रै जलम री महत्वाकांक्षा कांई हैजिका भगवान री किरपा रै हिस्सै सूं प्राप्त कर सकां। जिका परमेश्बर री किरपा री सिद्धता रै जरिया प्राप्त कर सकां सांसारिक सुख प्राप्त करण रा कांई फायदा हैआकाशीय आनंद रा कांई फायदा हैआकाशीय जगत रो आनंद कांई कैवै हैजद कोई मिनख सुख रो अनुभव करै है तो उणरो मन आनंदित हुवै है। जद बो दुख रो अनुभव करै है, तो उणरो मन बेचैन हो जावै है। तो, इण सवाल रो जवाब कांई है कांई म्हारो मन सुख अर दुख रो अनुभव करै हैकांई आपां करुणा रै कारण मांसाहारी जानवरां नै मांस दे सकांकांई आपां भूखा लोगां नै नजरअंदाज कर सकां अर फगत आपां रै परिवार रा सदस्यां नै ई खाणो देणो सरू कर सकांकांई आपां नै आपां रै सागै होबा आळा खतरा नै रोकबा री आजादी हैकांई आपां भोजन खायां बिना भूख सहन कर सकां हांमैं कियां जाणूं कै करुणा ईश्वर री किरपा नै पाबा रो एकमात्र तरीको हैदूजा जीव-जंतुवां रै वास्तै जीव-जंतुवां सूं करुणा कद साम्हीं आवैलाकरुणा सांसारिक नैतिकता प्रदान करै है। करुणा नीं हुवै तो आ बात समझणी चाइजै कै सांसारिक नैतिकता नीं रैवैला। कांईं हुयोकरुणा ईश्वर री किरपा रो एक औजार अर आंशिक प्रकटीकरण हैआपां नै साची-साची जाणणी चाइजै कै दयालु लोग देवता है।भगवान रै बणायोड़ा घणकरा जीव-जंतुवां नै भूख, हत्या, बीमारी आद सूं घणो दुख क्यूं हुवै है।करुणा अनुशासन री परिभाषा कांई है करुणा अनुशासन री व्याकरण कांई हैसुपनां रै बगत मिनखां रा शरीर न्यारा-न्यारा हुया करै हैजुड़वां भाईयां रो व्यक्तित्व अर काम न्यारा-न्यारा क्यूं हुवै हैकरुणा रो अनुशासनकांई फरिश्ता खाणो खावै है अर भूख भी राखै हैचाहे आत्मा नै भला बुरा रो अनुभव होवै या अंग अर मन नै सुख अर दुख रो अनुभव होवै जे आत्मा नै कीं भी अनुभव नीं होवै तो करुणा रो कांई कामकांई आपां करुणा रै कारण मांसाहारी जानवरां नै मांस दे सकां हांकांई पौधा खाणो करुणा रै खिलाफ हैआत्मा नै पिघलाबा आळी करुणा रै वास्तै पैदा होवण आळी ऊर्जा कठै सूं आवैलापैली रै जलम रै अस्तित्व नै कियां समझांब्याव अर दूजा समारोहां मांय आपां नै अत्यधिक आनंद कियां मिल सकै हैआकाशीय-आनंद प्राप्त करण आळा मिनख री कीर्ति कांई हैअंधा, बहरा, गूंगा अर लंगड़ा नै खिलाओ।अरे अबार तो अंधेरो है, भोजन रै वास्तै कठै जावांलाकांई आपां नै आपां रै शरीर नै चुणबा री आजादी हैपरम आनंद रो लाभ कांई हैकांई आपां नै आपां रा पशुवां, मित्रां अर काम करणियां नै भोजन देवणो चाइजैआपां भूखा लोगां नै भोजन देबा माथै क्यूं जोर दे रैया हांइण सांसारिक सुख नै प्राप्त करण आळा मिनख री कांई महिमा हैइण परम आनंद नै प्राप्त करण री महिमा कांई है - ज्ञान-शरीर अनूठो है।अगर आपां जाणणो चावां कै भगवान री किरपा नै कियां पा सकां, जकी प्राकृतिक है:-जद आत्मा बार-बार सगळा जीव-जंतुवां रै प्रति दयालु हुवै है तो आत्मा सूं ईश्वर री किरपा कियां उजागर हुवै हैभगवान री किरपा री सामान्यता कांई है, जो प्राकृतिक प्रकटीकरण हैगरीबां नै भोजन देबा रै बाबत वेद देव कांई कैवे है कांई मिनख दूजां री मदद रै बिना अकेलो रैय सकै हैआपां परमेश्बर री किरपा नै कियां पा सकां, जकी परमेश्बर रो स्वाभाविक प्रकटीकरण हैभगवान री किरपा आत्मा सूं कियां निकळै है, जद आत्मा बार-बार पिघल जावै हैआपां नै ओ जाणणो चाइजै कै अनुग्रह, भगवान रो प्राकृतिक प्रकटीकरण, हरेक जगां अर हरेक बगत इण भांत प्रगट हुवै है।मांस खाबा सूं जो संतोष मिलै है वो कियां रो सुख हैजीव-जंतुवां री मदद करणो ईश्वर री पूजा कियां मानीजै है?घरेलू जीवन मठवाद सूं चोखो है।एक गरीब आदमी भूखा आदमी नै भोजन कियां दे सकै हैस्वर्गीय अनुशासन जीवित प्राणियां रै प्रति करुणा रै कारण मौजूद है। जे करुणा कोनी हुवैला तो स्वर्गीय अनुशासन कोनी हुवैला। कांईं हुयोमांस कियां एक बुरो भोजन है मांस खाबा सूं मिलण आळी संतुष्टि आछी है कै माड़ीपरम आनंद कांई छैभगवान री विशेषता कियां बणणी है। कुणसा भगवान मिनख रै बराबर है, जिण भूखां नै भोजन करायो अर आनंद दियोएक समझदार मिनख कियां बणणो हैलाइलाज बीमारियां रो इलाज कियां करांएक सुविज्ञ संतान कियां प्राप्त करांलाम्बो जीवण कियां?जे थैं जाणणो चावो हो कै ओ अनुग्रह कियां पायो जा सकै हैभगवान री किरपा प्राप्त करण रो तरीकोसगळा मिनखां रै मांय मौजूद प्राकृतिक दया रो उपयोग कर'र भगवान री पूजा कियां करांजीव-जंतुवां रै प्रति दया दिखाणो ईश्वर री पूजा भी कैवै है।सिद्ध, ऋषि, तपस्वी कद दुखी हो जावे हैकांई भूख अपराजेय सम्राट नै हरा देसीकांई बांरी भूख बांनै आपरा लाडला टाबरां नै बेचबा नै मजबूर कर देलाभूख सगळा दुखां मांय सूं सबसूं बुरी है। कियांकांई भूख सूं पीड़ित होणो सगळा रै वास्तै एक जैड़ो हैआपां रै भूखा टाबरां रा थकेड़ा चेहरा कियां देख सकांबीमारीजंगलां अर दूर-दराज रै इलाकां रै मांय पौधां माथै पाणी ढाळणो म्हारो फर्ज है।पैली रै जलम रै मांय पापी कर्म इण वर्तमान रै जलम तांई कियां आवै हैखाणो करुणा दे रियो हैआपां बां लोगां री मदद करां जका परमेश्बर रै नियम रै मुजब दुखी हैकांई भूख ईश्वर-राज्य प्राप्त करण रो एक साधन हैकांई आपां अंकुरां नै काट सकां हां कांई आपां अंकुरां नै खा सकां हांकांई पौधां सूं बण्योड़ा पदार्थ बाल अर नाखून जित्ता अशुद्ध हैआपां नै कांई ठाह है कै पैली रो जलम हुयो होकांई नरक अर स्वर्ग हैकांई बीज जीवतो है के मरियोड़ो हैइण परम आनंद नै प्राप्त करण आळा री महिमा कांई है- ज्ञान-शरीर नै किणी भी चीज सूं बाधित नीं कर सकै।इण परम आनंद नै प्राप्त करण आळा री महिमा कांई है- ज्ञान-शरीर री कोई विशेषता कोनी हुवै।इण परम आनंद नै प्राप्त करण री महिमा कांई है- ज्ञान-शरीर अमर है, इण वास्तै इणनै पांच मूल तत्व प्रभावित नीं कर सकै।कामुक लोग भी आपरी भूख सूं चिंतित रैवै है अर भोजन री उम्मीद राखै है।भोजन देर सदा जीवोआपां भगवान री बाधा नै अवहेलना करांकांई आपां खतरनाक जानवरां नै मार सकां पैली क्यूं कैयो गयो हो कै दया नै सगळा जीव-जंतुवां रै वास्तै साझा करणी चाइजैब्याव या दूजा खुशी रै मौकै माथै करणो सबसूं जरूरी कांई हैस्वाभाविक रूप सूं, जानवरां अर चिड़ियां नै बां रै कर्म रै आधार माथै भोजन दियो गयो है। पण मिनख नै काम करणो पड़ै है अर भोजन करणो पड़ै है। क्यूंकरुणा रो सबसूं महताऊ लक्ष्य कांई है। आत्मा अर भगवान आपां रै मांय कठै रैवै हैभगवान वेदां (ग्रंथां) मांय इण भांत रो हुकम दियो है।जीवन रा ये तीन प्रकार रा सुख अर फायदा कियां प्राप्त कर सकां।निम्नलिखित कैवण आळा रै वास्तै जवाब। प्यास, डर आद रै कारण जीव नै जका दुख अर मन, आंख्यां आद अंगां रा अनुभव आत्मा रा अनुभव नीं है, इण वास्तै जीव-जंतुवां माथै करुणा राखण सूं कोई खास फायदो कोनी हुवै।खंडहर सूं साचा मंदिरां री रक्षा करो अर दयालु बणो।मिनख रै जलम रो उद्देश्य कांई है?ज्ञानी री भूख री आग बुझाओ।मिनख अर दूजा जीव खतरा सूं क्यूं प्रभावित हुवै हैजद दूजा जीव दुखी हुवै है तो केई मिनखां रै मांय दया क्यूं कोनी हुवै?करुणा अर अनुशासन री कमी रै कारण बुरा जन्म बढ़ता जावै है अर बुरा नैतिकता हरेक जगां है। कांईं हुयोआपणी जिंदगी रै मांय होबाळा सगळा दुखां सूं उबरणो कियां हैकद धर्मगुरु अपनी जाति धर्म के अनुशासन का पालन नहीं करेभूखे आदमी का दुःख दूर कर सुवा दे।भोजन रै माध्यम सूं जहर नै हटाओ अर बेहोशी सूं जीवित करो।जिण गरीब नै कोई सहारा कोनी है बां रो भोजन खिलाबा रो इनाम कांई हैजीवित प्राणियां रै प्रति करुणा दिखाबा रो अधिकार कियां पैदा हुवै है?करुणा सूं आत्मा नै पिघलाणो कांई हक हैजीव-जंतुवां रै प्रति करुणा राखण रो अधिकार कांई हैवां लोगां रो कांई जबाब है जका कैवे है कै "मिनख रा दुख फगत मन, आंख आद आंतरिक साधनां अर अंगां रो अनुभव है, आत्मा रो अनुभव कोनी, इण वास्तै जीवों री सहायता करणो करुणा कोनी है"। उणनै देवतावां अर सगळा सूं नमस्कार करणो चाइजैक्रूर बिच्छू रै डंक सूं बचाओ।भूख नामक पापी सूं बचाओ।भूख नामक जहरीली हवा सूं दीया नै कियां बचावा जावेभूख अर हत्या सूं लोगां री जान बचाई जाणी चाइजै।गूंगा आदमी री तरै भोजन मांगबा में संकोच करण आळा दुखी मिनख नै बचाओ।मक्खी नै बचाओ जकी शहद रै मांय पड़गी हैभूखा बाघ नै मार दो अर भूखा गरीब नै बचाओ।भूखा शरीर रै मांय दार्शनिक संरचनावां नै बचाओकांई आपां नै समंदर अर जमीन रै मांय रैवण आळा जीव-जंतुवां नै भोजन कराणो चाइजैकांई आपां नै आपां रै रैवासी जानवरां जियां कै गाय, भेड़ आद नै खिलाणो चाइजै।कांई आपां नै काम करणो चाइजै अर खाणो चाइजैकेई लोग क्यूं कै रैया है कै कोई पैलो जलम कोनी है अर ना ही कोई आगलो जलम हैआत्मावां नै आपरै प्रयासां रै जरियै नूंवा शरीर अर धन मिलै है।इण परम आनंद- कर्म सिद्धि, योग सिद्धि, ज्ञान सिद्धि अर ज्ञान-शरीर री अलौकिक शक्तियां नै प्राप्त करणै वाळा री महिमा कांई है।आपां परम-आनंद जीवन नै कियां प्राप्त कर सकांजद प्रभु री किरपा प्रकट होवैला, तो परमेश्बर रो आनंद कियां अनुभव अर सिद्ध होवैलाइण उच्चतम मिनख जन्म रो लक्ष्य प्राप्त करो।करुणा ईश्वर री किरपा प्राप्त करण रो एकमात्र तरीको हैदो प्रकार री करुणावल्लालर इतिहास: मौत माथै विजय प्राप्त करण आळा मिनख रो इतिहास।कांई आपां नै आपां रै द्वारा लगायोड़ा पौधां माथै पाणी ढाळणो चाइजैअमीर लोगां नै पीड़ित लोगां री मदद करणी चाइजै। क्यूंजीवन रा तीन प्रकार कांई है। आत्मा रो सुखी जीवन कितरो प्रकार है।करुणा रा कांई प्रकार है करुणा रा दो प्रकार है।बीमारी कांई छैकरुणा कांई है?खतरा कांई छैइच्छा कांई छैडर कांई छैभूख कांई छैहत्या कांई छैगरीबी कांई छैपाप कांई छैपरम आनंद कांई छैभगवान रो हुकम कांई हैकरुणा री ताकत कांई हैकरुणा रो उद्देश्य कांई हैपुण्य कांई छैसांसारिक करुणा कांई छैसांसारिक सुख कांई छैकोई गणमान्य मिनख आपरी इज्जत कद खोवै हैजद एक जीव दूजा जीव-जंतुवां रै वास्तै पिघल जावैला (दया करैला) तो एक जीव दूजा जीव रै वास्तै दया करैला।घमण्डी लोग आपरो घमंड कद खो देवै हैअहंकार अहंकारी लोगां सूं कद दूर जावै हैआत्मा शरीर रै मांय कियां प्रवेश करै है, आत्मा गर्भ रै मांय कद प्रवेश करै है जद मिनखां नै भूख लाग जावैला तो कांई होसीपौराणिक शूरवीर कद डरसीकांई ज्ञानी, जिका पूरी तरह सूं त्याग कर चुक्या है, परेशान हो जावैलाजद समझदार तकनीशियन आपरी समझ खो देवै है अर भ्रमित हो जावै है।कुणसो सुख परम है परमानंद री सर्वोच्च अवस्था कुणसी हैपवित्र मिनख कुण कैयो जावै है?परम आनंद प्राप्तकर्ता कोन हैज्ञान रै जरियै भगवान नै कियां जाणणो है अर खुद भगवान कियां बणणो है एक मुक्त आत्मा कांई हैकेई लोग दया क्यूं कोनी दिखावै अर कठोर हो जावै है, जद वे दूजा जीव-जंतुवां रो दुख देखै है तो बांनै भाईचारा रा अधिकार क्यूं कोनी हैम्हानै शरीर री कांई जरूरत हैभूख अर हत्या नै खत्म करण रो कांई महत्व है, परम करुणा रै संदर्भ मेंकेई लोग कठोर मन रा हुवै है अर दूजा जीव-जंतुवां रा दुख देख’र दया नीं करै। आं लोगां नै आत्मा रो अधिकार क्यूं कोनी हैभगवान रै बणायोड़ा घणकरा जीव भूख, प्यास, डर आद सूं क्यूं पीड़ित है।कांई सगळा मिनख फेरूं मिनख रै रूप मांय जलम लेवैला। कांई फगत मिनखां नै ई भोजन देवणो पड़ैलाकांई बाघ घास खावैला। कांई मांस बाघां रै वास्तै एक नियत भोजन हैगरीब लोगां रा आंसू पोंछणो करुणा कैवै है।
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