वल्लालर इतिहास: मौत माथै विजय प्राप्त करण आळा मिनख रो इतिहास।
वल्लालर इतिहास: मौत माथै विजय प्राप्त करण आळा मिनख रो इतिहास।
आपां नै वल्लालर रो इतिहास क्यूं पढ़णो चाइजै? मौत माथै विजय प्राप्त करण आळा मिनख रो साचो इतिहास। वो साचो वैज्ञानिक जिण मिनख नै बिना मरे जीवण रो मारग खोज्यो। वो जिण विग्यान री खोज करी जिणसूं मिनख रै शरीर नै अमर शरीर में बदल दियो जा सकै। वो जिण मिनख रै शरीर नै ज्ञान रै शरीर में बदल दियो। वो जिण म्हानै बिना मरे जीवण रो मारग बतायो। वो जिको परमेश्बर री प्राकृतिक सच्चाई रो अनुभव करियो अर आपां नै बतायो कै परमेश्बर रो अमर रूप कांई है अर वो कठै है। वो जिसने सारे अंधविश्वास दूर कर म्हारे ज्ञान तै हर बात पै सवाल उठा कै साचा ज्ञान प्राप्त करया।
साचा वैज्ञानिक रो नांव: रामलिंगम वो नांव जिण सूं प्रियजन बांनै पुकारै है: वल्लालर। जलम वर्ष : 1823 देह रै उजास रै शरीर में रूपांतरण रो वर्ष : 1874 जन्म स्थान : भारत, चिदम्बरम, मरुदुर। उपलब्धि: वो जिणनै ओ ठाह लाग्यो कै मिनख भगवान री अवस्था नै भी प्राप्त कर सकै है अर मर नीं सकै है, अर वा अवस्था नै प्राप्त कर ली। भारत में तमिलनाडु में चिदम्बरम शहर सूं बीस किलोमीटर उत्तर में स्थित मरूधुर नामक कस्बे में रामलिंगम उर्फ वल्लालर रो जलम 5 अक्टूबर, 1823 रविवार नै सांय 5 बजकर 54 मिनट माथै हुयो।
वल्लालर रै पिता रो नाम रमैया हो अर माता रो नाम चिन्नम्माई हो। फादर रमैया मरुधुर रा एकाउंटेंट अर टाबरां नै पढ़ावण आळा मास्टर हा। मां चिन्नम्माई घर री देखभाळ करी अर आपरै टाबरां री परवरिश करी। वल्लालर रा पिता रमैया रो जलम रै छठै महीनै पछै ई देहांत हुयग्यो। मां चिन्नमई आपरै टाबरां री पढ़ाई अर भविष्य नै देखता थकां भारत रै चेन्नई चली गी। वल्लालर रा मोटा भाई सबापति कांचीपुरम रा प्रोफेसर सबापति रै सागै पढ़ाई करी। वै महाकाव्य प्रवचन रा मास्टर बणग्या। प्रवचनां मांय जावण सूं कमायोड़ा धन नै बो आपरै परिवार रो भरण-पोषण करण सारू काम में लेंवतो। सबपति खुद आपरै छोटै भाई रामलिंगम नै भणायो। पछै बांनै आपरै सागै पढ्योड़ा अध्यापक कांचीपुरम रा प्रोफेसर सबापति रै कनै पढण सारू भेज दियो।
चेन्नई लौट्या रामलिंगम अक्सर कांडासामी मिंदर में जाया करता हा। वे कांडाकोट्टम में भगवान मुरुगन री पूजा करबा में राजी हुया। छोटी उमर में ही प्रभु रै बारै में गीत रच्या अर गाया। न तो स्कूल जाबाळा अर न ही घरां रैबाळा रामलिंगम नै बडेरा सबापति फटकार लगाई। पण रामलिंगम आपरै मोटै भाई री बात नीं सुणी। इण वास्तै सबपति आपरी घरआळी पपथी अम्माल नै रामलिंगम नै भोजन परोसणो बंद करण रो सख्ती सूं हुकम दियो। रामलिंगम आपरै लाडलै बडेरै री अरज मानै अर घरां रैय’र पढण रो वचन दियो। रामलिंगम घर रै ऊपरलै कमरै मांय ई रैयग्या। भोजन रै बगत नै छोड़’र, वै दूजा बगत कमरै मांय ई रैवता अर भगवान री पूजा करण मांय सक्रिय रैवता। एक दिन, भींत माथै दर्पण रै मांय, वो गदगद हो अर गीत गाया, ओ मानता थका कै भगवान उणनै प्रकट कर दियो है।
पौराणिक कथावां माथै व्याख्यान देवण वाळा उणरा बडा भाई सबपति बीमारी रै कारण उण व्याख्यान में नीं आ सक्या जिण माथै वै राजी हुया हा। तो उण आपरै छोटै भाई रामलिंगम नै कैयो कै जठै व्याख्यान होवणो है, बठै जावै अर आपरै आवण री असमर्थता नै पूरा करण सारू कीं गीत गावै। इण मुजब रामलिंगम उठै गया। उण दिन सबापति रो व्याख्यान सुणन नै घणी संख्या में लोग भेळा हुया हा। रामलिंगम आपरै मोटै भाई रै बतायोड़ा केई गीत गाया। इणरै बाद वठै भेळा हुया लोग घणी देर तांई जिद करता रैया कै वै कोई आध्यात्मिक व्याख्यान देवै। सो रामलिंगम भी राजी हुयग्या। व्याख्यान देर रात नै दियो गयो। सगळा अचंभित अर प्रशंसा कर रैया हा। ओ बां रो पैलो व्याख्यान हो। उण बगत वै नौ बरस रा हा।
रामलिंगम बारह बरस री उमर सूं ही तिरुवोत्रियुर रै मांय पूजा करणो सरू कर दियो। वो जठै रैवता हा, सात कुंआ रै इलाकै सूं रोज पैदल तिरुवोत्रियुर जांवता हा। घणकरा लोगां रै आग्रह रै पाछै रामलिंगम सत्ताईस बरस री उमर मांय ब्याव करण नै राजी हुयग्या। उण आपरी बैन उन्नमुलाई री बेटी थानाकोडी सूं ब्याव कर लियो। पति-पत्नी दोनूं ई पारिवारिक जीवन सूं जुड़िया कोनी हा अर भगवान रै विचारां मांय डूबग्या हा। आपरी घरआळी थानाकोडी री सहमति सूं वैवाहिक जीवन एक ही दिन में पूरो हो जावै है। आपरी घरआळी री सहमति सूं, वल्लालर अमरता प्राप्त करण रा प्रयास जारी राखै है। रामलिंगम ज्ञान रै माध्यम सूं साचै भगवान नै जाणणो चावता हा। इण कारण सन् 1858 में वे चेन्नई छोड'र कई मंदिरां रा दर्शन कर'र चिदंबरम नामक नगरी में पूग्या। चिदम्बरम में वल्लालर नै देखर तिरुवेंगदम नामक करुंगुझी नामक एक नगर रा प्रशासक उणनै आपरै नगर अर आपरै घर में आवा अर रैवण री अरज करी। आपरै प्रेम सूं बंधी वल्लालर नौ बरसां तांई तिरुवेंगडम रै निवास माथै रैयी।
असली भगवान आपां रै सिर रै दिमाग रै मांय एक छोटै परमाणु रै रूप मांय स्थित है। उण भगवान रो उजास अरब सूरज री रोशनी रै बराबर है। इण वास्तै आम जनता नै भगवान नै समझण सारू जो आपां रै मांय उजास है, वल्लालर बारै एक दीयो राख दियो अर उजास रै रूप में उणरी स्तुति करी। उणां सन् 1871 में सत्य धर्मचलाई रै कनै एक प्रकाश रो मिंदर बणावणो सरू करियो। उणां इण मंदिर रो नांव राख्यो, जिको करीब छह महीनां में पूरो हुयो, 'ज्ञान परिषद'। उण भगवान रै वास्तै वडालूर नामक कस्बै मांय एक मिंदर बणायो जिको आपां रै दिमाग मांय महान ज्ञान रै रूप मांय उजास रै रूप मांय रैवै। असली भगवान तो आपां रै सिर मांय ज्ञान है अर जिका लोग इणनै नीं समझ सकै, बां रै वास्तै बां धरती माथै एक मिंदर बणायो, उण मिंदर मांय एक दीयो जळायो अर बांनै कैयो कै वै उण दीया नै भगवान समझै अर उणरी पूजा करै। जद आपां आपां रा विचारां नै इण तरै सूं केंद्रित करां तो आपां उण भगवान रो अनुभव करां जिको आपां रै सिर मांय ज्ञान है।
मंगलवार सुबह आठ बजे मेत्तुकुप्पम कस्बे में सिद्धि वलकम नामक इमारत के आगे ध्वजारोहण कर इकट्ठे हुए लोगों को लाम्बो प्रवचन दिया। उण प्रवचन नै 'अपार उपदेश' कैवै है। यो उपदेश मिनख नै हमेशा खुश रैवण रो मार्गदर्शन करै है। यो हाथ रै मांय उठबा आळा घणकरा सवालां रा जवाब देवै है। उपदेश आपणी अंधविश्वास नै तोड़बा रै बारै मांय है। वै कैवै कै साचो मारग ओ है कै प्रकृति रै साच नै जाणणो अर अनुभव करणो। इत्तो ही कोनी। वल्लालर खुद घणा सारा सवाल पूछ्या है जिण माथै आपां सोच्यो कोनी अर बां रा जवाब कोनी दिया। वै सवाल इण भांत है:।
भगवान कांई है? भगवान कठै है? भगवान एक है के कई? आपां नै भगवान री पूजा क्यूं करणी चाइजै? जे आपां भगवान री पूजा नीं करांला तो कांई होसी? कांई स्वर्ग जैड़ी कोई चीज है? आपां नै भगवान री पूजा कियां करणी चाइजै? भगवान एक है के कई? कांई भगवान रा हाथ अर पग है? कांई आपां भगवान रै वास्तै कीं कर सकां? भगवान नै पाबा रो सबसूं सोरो तरीको कांई है? प्रकृति रै मांय भगवान कठै है? अमर रूप कोनसा रूप है ? आपां आपां रै ज्ञान नै साचै ज्ञान में कियां बदळ सकां? थै सवाल कियां पूछो हो अर बां रा जवाब कियां लेवो हो? म्हारै सूं सांच नै कांई छुपावै है? कांई आपां बिना काम किये भगवान सूं कीं ले सकां? कांई धरम साचा परमेश्बर नै जाणबा रै वास्तै काम आवै है?
ध्वजारोहण रै बाद आगलो कार्यक्रम हो, तमिल महीनै कार्तिगाई रै मांय, उजास मनाबा आळा त्योहार रै दिन, बां आपरै कमरै रै मांय हमेशा जलता दीपा दीप नै लेय'र बां रै साम्हीं राख दियो। हवेली। सन् 1874 में थाई महीनै री 19 तारीख अर्थात जनवरी में भारतीय खगोल विग्यान में बताई गई पूसम तारा रै दिन वल्लालर सगळा नै आशीर्वाद दियो। वल्लालर आधी रात नै हवेली रै कमरै मांय दाखिल हुयो। उणरी इच्छा मुजब उणां रा महताऊ शिष्य कल्पट्टू ऐया अर थोझुवर वेलयुधम बंद कमरै रो दरवाजो बारै सूं बंद कर दियो।
उण दिन सूं, वल्लालर आपणी भौतिक आंख्यां रै सामी एक रूप रै रूप में प्रकट नीं हुयो है, बल्कि ज्ञान रै निर्माण रै वास्तै एक दिव्य प्रकाश रैयो है। चूंकि आपणी भौतिक आंख्यां मांय ज्ञान रै शरीर नै देखण री ताकत कोनी है, इण वास्तै वे आपणा प्रभु नै नीं देख सकै, जको हमेशा अर हरेक जगां है। चूंकि ज्ञान रो शरीर मिनख री आंख्यां नै देखण आळा स्पेक्ट्रम री तरंग दैर्ध्य सूं परे है, इण वास्तै आपणी आंख्यां इणनै देख नीं सकै। वल्लालर, जियां कै वो जाणतो हो, पैली आपरै मिनख शरीर नै एक शुद्ध शरीर में बदल दियो, फेर ओम नामक ध्वनि शरीर में अर फेर अनन्त ज्ञान रै शरीर में, अर वो हमेशा आपां रै सागै है अर आपरी किरपा प्रदान करै है।
मारवाड़ी भाषा में वल्लालर अर वांरी पोथ्यां रै बारै में सगळी बातां
सगळा जीव बराबर है।मिनख रै जलम री महत्वाकांक्षा कांई हैजिका भगवान री किरपा रै हिस्सै सूं प्राप्त कर सकां। जिका परमेश्बर री किरपा री सिद्धता रै जरिया प्राप्त कर सकां सांसारिक सुख प्राप्त करण रा कांई फायदा हैआकाशीय आनंद रा कांई फायदा हैआकाशीय जगत रो आनंद कांई कैवै हैजद कोई मिनख सुख रो अनुभव करै है तो उणरो मन आनंदित हुवै है। जद बो दुख रो अनुभव करै है, तो उणरो मन बेचैन हो जावै है। तो, इण सवाल रो जवाब कांई है कांई म्हारो मन सुख अर दुख रो अनुभव करै हैकांई आपां करुणा रै कारण मांसाहारी जानवरां नै मांस दे सकांकांई आपां भूखा लोगां नै नजरअंदाज कर सकां अर फगत आपां रै परिवार रा सदस्यां नै ई खाणो देणो सरू कर सकांकांई आपां नै आपां रै सागै होबा आळा खतरा नै रोकबा री आजादी हैकांई आपां भोजन खायां बिना भूख सहन कर सकां हांकांई आपां वल्लालर री मूर्ति री पूजा कर सकां? कांई आपां वल्लालर री मूर्ति नै घरां राख सकां?मैं कियां जाणूं कै करुणा ईश्वर री किरपा नै पाबा रो एकमात्र तरीको हैदूजा जीव-जंतुवां रै वास्तै जीव-जंतुवां सूं करुणा कद साम्हीं आवैलाकरुणा सांसारिक नैतिकता प्रदान करै है। करुणा नीं हुवै तो आ बात समझणी चाइजै कै सांसारिक नैतिकता नीं रैवैला। कांईं हुयोकरुणा ईश्वर री किरपा रो एक औजार अर आंशिक प्रकटीकरण हैआपां नै साची-साची जाणणी चाइजै कै दयालु लोग देवता है।भगवान रै बणायोड़ा घणकरा जीव-जंतुवां नै भूख, हत्या, बीमारी आद सूं घणो दुख क्यूं हुवै है।करुणा अनुशासन री परिभाषा कांई है करुणा अनुशासन री व्याकरण कांई हैसुपनां रै बगत मिनखां रा शरीर न्यारा-न्यारा हुया करै हैजुड़वां भाईयां रो व्यक्तित्व अर काम न्यारा-न्यारा क्यूं हुवै हैकरुणा रो अनुशासनकांई फरिश्ता खाणो खावै है अर भूख भी राखै हैचाहे आत्मा नै भला बुरा रो अनुभव होवै या अंग अर मन नै सुख अर दुख रो अनुभव होवै जे आत्मा नै कीं भी अनुभव नीं होवै तो करुणा रो कांई कामकांई आपां करुणा रै कारण मांसाहारी जानवरां नै मांस दे सकां हांकांई पौधा खाणो करुणा रै खिलाफ हैआत्मा नै पिघलाबा आळी करुणा रै वास्तै पैदा होवण आळी ऊर्जा कठै सूं आवैलापैली रै जलम रै अस्तित्व नै कियां समझांब्याव अर दूजा समारोहां मांय आपां नै अत्यधिक आनंद कियां मिल सकै हैआकाशीय-आनंद प्राप्त करण आळा मिनख री कीर्ति कांई हैअंधा, बहरा, गूंगा अर लंगड़ा नै खिलाओ।अरे अबार तो अंधेरो है, भोजन रै वास्तै कठै जावांलाकांई आपां नै आपां रै शरीर नै चुणबा री आजादी हैपरम आनंद रो लाभ कांई हैकांई आपां नै आपां रा पशुवां, मित्रां अर काम करणियां नै भोजन देवणो चाइजैआपां भूखा लोगां नै भोजन देबा माथै क्यूं जोर दे रैया हांइण सांसारिक सुख नै प्राप्त करण आळा मिनख री कांई महिमा हैइण परम आनंद नै प्राप्त करण री महिमा कांई है - ज्ञान-शरीर अनूठो है।अगर आपां जाणणो चावां कै भगवान री किरपा नै कियां पा सकां, जकी प्राकृतिक है:-जद आत्मा बार-बार सगळा जीव-जंतुवां रै प्रति दयालु हुवै है तो आत्मा सूं ईश्वर री किरपा कियां उजागर हुवै हैभगवान री किरपा री सामान्यता कांई है, जो प्राकृतिक प्रकटीकरण हैगरीबां नै भोजन देबा रै बाबत वेद देव कांई कैवे है कांई मिनख दूजां री मदद रै बिना अकेलो रैय सकै हैआपां परमेश्बर री किरपा नै कियां पा सकां, जकी परमेश्बर रो स्वाभाविक प्रकटीकरण हैभगवान री किरपा आत्मा सूं कियां निकळै है, जद आत्मा बार-बार पिघल जावै हैआपां नै ओ जाणणो चाइजै कै अनुग्रह, भगवान रो प्राकृतिक प्रकटीकरण, हरेक जगां अर हरेक बगत इण भांत प्रगट हुवै है।मांस खाबा सूं जो संतोष मिलै है वो कियां रो सुख हैजीव-जंतुवां री मदद करणो ईश्वर री पूजा कियां मानीजै है?घरेलू जीवन मठवाद सूं चोखो है।एक गरीब आदमी भूखा आदमी नै भोजन कियां दे सकै हैस्वर्गीय अनुशासन जीवित प्राणियां रै प्रति करुणा रै कारण मौजूद है। जे करुणा कोनी हुवैला तो स्वर्गीय अनुशासन कोनी हुवैला। कांईं हुयोमांस कियां एक बुरो भोजन है मांस खाबा सूं मिलण आळी संतुष्टि आछी है कै माड़ीपरम आनंद कांई छैभगवान री विशेषता कियां बणणी है। कुणसा भगवान मिनख रै बराबर है, जिण भूखां नै भोजन करायो अर आनंद दियोएक समझदार मिनख कियां बणणो हैलाइलाज बीमारियां रो इलाज कियां करांएक सुविज्ञ संतान कियां प्राप्त करांलाम्बो जीवण कियां?जे थैं जाणणो चावो हो कै ओ अनुग्रह कियां पायो जा सकै हैभगवान री किरपा प्राप्त करण रो तरीकोसगळा मिनखां रै मांय मौजूद प्राकृतिक दया रो उपयोग कर'र भगवान री पूजा कियां करांजीव-जंतुवां रै प्रति दया दिखाणो ईश्वर री पूजा भी कैवै है।सिद्ध, ऋषि, तपस्वी कद दुखी हो जावे हैकांई भूख अपराजेय सम्राट नै हरा देसीकांई बांरी भूख बांनै आपरा लाडला टाबरां नै बेचबा नै मजबूर कर देलाभूख सगळा दुखां मांय सूं सबसूं बुरी है। कियांकांई भूख सूं पीड़ित होणो सगळा रै वास्तै एक जैड़ो हैआपां रै भूखा टाबरां रा थकेड़ा चेहरा कियां देख सकांबीमारीजंगलां अर दूर-दराज रै इलाकां रै मांय पौधां माथै पाणी ढाळणो म्हारो फर्ज है।पैली रै जलम रै मांय पापी कर्म इण वर्तमान रै जलम तांई कियां आवै हैखाणो करुणा दे रियो हैआपां बां लोगां री मदद करां जका परमेश्बर रै नियम रै मुजब दुखी हैकांई भूख ईश्वर-राज्य प्राप्त करण रो एक साधन हैकांई आपां अंकुरां नै काट सकां हां कांई आपां अंकुरां नै खा सकां हांकांई पौधां सूं बण्योड़ा पदार्थ बाल अर नाखून जित्ता अशुद्ध हैआपां नै कांई ठाह है कै पैली रो जलम हुयो होकांई नरक अर स्वर्ग हैकांई बीज जीवतो है के मरियोड़ो हैइण परम आनंद नै प्राप्त करण आळा री महिमा कांई है- ज्ञान-शरीर नै किणी भी चीज सूं बाधित नीं कर सकै।इण परम आनंद नै प्राप्त करण आळा री महिमा कांई है- ज्ञान-शरीर री कोई विशेषता कोनी हुवै।इण परम आनंद नै प्राप्त करण री महिमा कांई है- ज्ञान-शरीर अमर है, इण वास्तै इणनै पांच मूल तत्व प्रभावित नीं कर सकै।कामुक लोग भी आपरी भूख सूं चिंतित रैवै है अर भोजन री उम्मीद राखै है।भोजन देर सदा जीवोआपां भगवान री बाधा नै अवहेलना करांकांई आपां खतरनाक जानवरां नै मार सकां पैली क्यूं कैयो गयो हो कै दया नै सगळा जीव-जंतुवां रै वास्तै साझा करणी चाइजैवल्लालर नाम रो कांई अरथ है?ब्याव या दूजा खुशी रै मौकै माथै करणो सबसूं जरूरी कांई हैवल्लालर री घरआळी रो नाम कांई है?स्वाभाविक रूप सूं, जानवरां अर चिड़ियां नै बां रै कर्म रै आधार माथै भोजन दियो गयो है। पण मिनख नै काम करणो पड़ै है अर भोजन करणो पड़ै है। क्यूंकरुणा रो सबसूं महताऊ लक्ष्य कांई है। आत्मा अर भगवान आपां रै मांय कठै रैवै हैभगवान वेदां (ग्रंथां) मांय इण भांत रो हुकम दियो है।जीवन रा ये तीन प्रकार रा सुख अर फायदा कियां प्राप्त कर सकां।वल्लालर री मूळ तस्वीर।निम्नलिखित कैवण आळा रै वास्तै जवाब। प्यास, डर आद रै कारण जीव नै जका दुख अर मन, आंख्यां आद अंगां रा अनुभव आत्मा रा अनुभव नीं है, इण वास्तै जीव-जंतुवां माथै करुणा राखण सूं कोई खास फायदो कोनी हुवै।खंडहर सूं साचा मंदिरां री रक्षा करो अर दयालु बणो।मिनख रै जलम रो उद्देश्य कांई है?ज्ञानी री भूख री आग बुझाओ।मिनख अर दूजा जीव खतरा सूं क्यूं प्रभावित हुवै हैजद दूजा जीव दुखी हुवै है तो केई मिनखां रै मांय दया क्यूं कोनी हुवै?करुणा अर अनुशासन री कमी रै कारण बुरा जन्म बढ़ता जावै है अर बुरा नैतिकता हरेक जगां है। कांईं हुयोआपणी जिंदगी रै मांय होबाळा सगळा दुखां सूं उबरणो कियां हैवल्लालर रो धर्म कांई है?कद धर्मगुरु अपनी जाति धर्म के अनुशासन का पालन नहीं करेभूखे आदमी का दुःख दूर कर सुवा दे।भोजन रै माध्यम सूं जहर नै हटाओ अर बेहोशी सूं जीवित करो।जिण गरीब नै कोई सहारा कोनी है बां रो भोजन खिलाबा रो इनाम कांई हैजीवित प्राणियां रै प्रति करुणा दिखाबा रो अधिकार कियां पैदा हुवै है?करुणा सूं आत्मा नै पिघलाणो कांई हक हैजीव-जंतुवां रै प्रति करुणा राखण रो अधिकार कांई हैवां लोगां रो कांई जबाब है जका कैवे है कै "मिनख रा दुख फगत मन, आंख आद आंतरिक साधनां अर अंगां रो अनुभव है, आत्मा रो अनुभव कोनी, इण वास्तै जीवों री सहायता करणो करुणा कोनी है"। उणनै देवतावां अर सगळा सूं नमस्कार करणो चाइजैक्रूर बिच्छू रै डंक सूं बचाओ।भूख नामक पापी सूं बचाओ।भूख नामक जहरीली हवा सूं दीया नै कियां बचावा जावेभूख अर हत्या सूं लोगां री जान बचाई जाणी चाइजै।गूंगा आदमी री तरै भोजन मांगबा में संकोच करण आळा दुखी मिनख नै बचाओ।मक्खी नै बचाओ जकी शहद रै मांय पड़गी हैभूखा बाघ नै मार दो अर भूखा गरीब नै बचाओ।भूखा शरीर रै मांय दार्शनिक संरचनावां नै बचाओकांई आपां नै समंदर अर जमीन रै मांय रैवण आळा जीव-जंतुवां नै भोजन कराणो चाइजैकांई आपां नै आपां रै रैवासी जानवरां जियां कै गाय, भेड़ आद नै खिलाणो चाइजै।कांई आपां नै काम करणो चाइजै अर खाणो चाइजैकेई लोग क्यूं कै रैया है कै कोई पैलो जलम कोनी है अर ना ही कोई आगलो जलम हैआत्मावां नै आपरै प्रयासां रै जरियै नूंवा शरीर अर धन मिलै है।इण परम आनंद- कर्म सिद्धि, योग सिद्धि, ज्ञान सिद्धि अर ज्ञान-शरीर री अलौकिक शक्तियां नै प्राप्त करणै वाळा री महिमा कांई है।आपां परम-आनंद जीवन नै कियां प्राप्त कर सकांजद प्रभु री किरपा प्रकट होवैला, तो परमेश्बर रो आनंद कियां अनुभव अर सिद्ध होवैलाइण उच्चतम मिनख जन्म रो लक्ष्य प्राप्त करो।करुणा ईश्वर री किरपा प्राप्त करण रो एकमात्र तरीको हैदो प्रकार री करुणावल्लालर भगवान माथै विश्वास करै है?वल्लालर जाति कांई है?वल्लालर आपरो माथो क्यूं ढक लियो?वल्लालर रो गायब होणो।वल्लालर झंडा। वल्लालर झंडा रो कांई मतलब है?वल्लालर इतिहास: मौत माथै विजय प्राप्त करण आळा मिनख रो इतिहास।वैलालर रै जीवण री अवधि कांई है?वैलालर रा उद्धरणवल्लालर रो असली नांव कांई है?वल्लालर री शिक्षावां कांई है?वैलालर रो जलम रो साल कांई है? वैलालर रो बरस।वल्लालर री जलम तारीख कांई है?वल्लालर री जलमभूमि रो नांव कांई है?वल्लालर की जीवा समाधि कहाँ स्थित है ?कांई आपां नै आपां रै द्वारा लगायोड़ा पौधां माथै पाणी ढाळणो चाइजैअमीर लोगां नै पीड़ित लोगां री मदद करणी चाइजै। क्यूंजीवन रा तीन प्रकार कांई है। आत्मा रो सुखी जीवन कितरो प्रकार है।करुणा रा कांई प्रकार है करुणा रा दो प्रकार है।बीमारी कांई छैकरुणा कांई है?खतरा कांई छैइच्छा कांई छैडर कांई छैभूख कांई छैहत्या कांई छैगरीबी कांई छैपाप कांई छैपरम आनंद कांई छैभगवान रो हुकम कांई हैकरुणा री ताकत कांई हैकरुणा रो उद्देश्य कांई हैपुण्य कांई छैसांसारिक करुणा कांई छैसांसारिक सुख कांई छैकोई गणमान्य मिनख आपरी इज्जत कद खोवै हैजद एक जीव दूजा जीव-जंतुवां रै वास्तै पिघल जावैला (दया करैला) तो एक जीव दूजा जीव रै वास्तै दया करैला।घमण्डी लोग आपरो घमंड कद खो देवै हैअहंकार अहंकारी लोगां सूं कद दूर जावै हैआत्मा शरीर रै मांय कियां प्रवेश करै है, आत्मा गर्भ रै मांय कद प्रवेश करै है जद मिनखां नै भूख लाग जावैला तो कांई होसीपौराणिक शूरवीर कद डरसीकांई ज्ञानी, जिका पूरी तरह सूं त्याग कर चुक्या है, परेशान हो जावैलाजद समझदार तकनीशियन आपरी समझ खो देवै है अर भ्रमित हो जावै है।कुणसो सुख परम है परमानंद री सर्वोच्च अवस्था कुणसी हैपवित्र मिनख कुण कैयो जावै है?परम आनंद प्राप्तकर्ता कोन हैज्ञान रै जरियै भगवान नै कियां जाणणो है अर खुद भगवान कियां बणणो है एक मुक्त आत्मा कांई हैकेई लोग दया क्यूं कोनी दिखावै अर कठोर हो जावै है, जद वे दूजा जीव-जंतुवां रो दुख देखै है तो बांनै भाईचारा रा अधिकार क्यूं कोनी हैम्हानै शरीर री कांई जरूरत हैभूख अर हत्या नै खत्म करण रो कांई महत्व है, परम करुणा रै संदर्भ मेंकेई लोग कठोर मन रा हुवै है अर दूजा जीव-जंतुवां रा दुख देख’र दया नीं करै। आं लोगां नै आत्मा रो अधिकार क्यूं कोनी हैभगवान रै बणायोड़ा घणकरा जीव भूख, प्यास, डर आद सूं क्यूं पीड़ित है।कांई सगळा मिनख फेरूं मिनख रै रूप मांय जलम लेवैला। कांई फगत मिनखां नै ई भोजन देवणो पड़ैलाकांई बाघ घास खावैला। कांई मांस बाघां रै वास्तै एक नियत भोजन हैगरीब लोगां रा आंसू पोंछणो करुणा कैवै है।
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